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कैंची साइकिल की यादें, भगौड़ों की बातें और मृत्यु का सही समय : तीन ताल, Ep 34

Teen Taal1h 26m

तीन ताल के 34वें एपिसोड में कमलेश ‘ताऊ’, पाणिनि ‘बाबा’ और कुलदीप ‘सरदार’ से सुनिए:

दो जून और तीन जून के बीच का अंतर और तीन बेर खाने वाली रानी की कहानी

हिन्दी के लिए बाबा का बिगिनर्स गाइड. कौन से उपन्यास पढ़ें और भाषा को कैसे बरतें. ताऊ की पढ़ी आखिरी उर्दू किताब का ज़िक्र.

बात साइकिल की जो अवध में 'सयकिल' हो गयी. जिसने अपने डंडे सरीखे कंधों पर जाने कितनी उम्मीदों और सपनों का बोझ उठाया.

बाबा और ताऊ के बचपन में साइकिल की यादें, और ताऊ टू व्हीलर चलाना क्यों नहीं सीख पाये.

पलायन में साइकिल ही काम क्यों आती है. साइकिल से जुड़ी फिल्में और एक नज़्म.

'बिज़ार' ख़बरों में सलमान की कहानी जिसने जेल जाने की चाहत में प्रधानमंत्री को धमकी दे डाली.

जेल की आज़ादी और खुले में क़ैद. कारागार, कारावास और बन्दीगृह का फ़र्क़.

मुख़्तसर सी चर्चा भगौड़ों पर. भगौड़ा शब्द की परिधि में कौन-कौन आता है और भाग जाने की उपयोगिता.

मेहुल भाई के लिए सरकार ने जाल तो अच्छा बिछाया पर गरारी कहाँ फँस गयी ?

क्या होगा जब इंसान डेढ़ सौ साल जीने लगेंगे? बूढ़ों का देश कैसा होगा? लम्बी ज़िंदगी और बड़ी जिन्दगी का फ़र्क़.

बाबा ने क्यों कहा कि मौत पाकिस्तानी क़व्वाल अज़ीज़ मियां की तरह होनी चाहिए.

और आखिर में 'न्योता वाले श्रोता' में हमारे लिसनर ज्ञानदत्त पाण्डेय का ब्लॉग जिसमें उन्होंने तीन ताल का बारीक और ईमानदार एनालिसिस किया है और इस पर बाबा और ताऊ का जवाब.

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